आज कई मोटी-मोटी डायरियों का पुस्तकालय बन गया होता।
इतने मरीजों के ऑपरेशन करने के बावजूद आज तक मैं किसी भी मरीज के सामने नर्वस महसूस नहीं किया। परंतु आज पहली बार मेरे हाथ कांप रहे थे , धड़कनें बढ़ रही थी और दिल जोरो से घबरारहे थे ।

आज कई मोटी-मोटी डायरियों का पुस्तकालय बन गया होता।
इतने मरीजों के ऑपरेशन करने के बावजूद आज तक मैं किसी भी मरीज के सामने नर्वस महसूस नहीं किया। परंतु आज पहली बार मेरे हाथ कांप रहे थे , धड़कनें बढ़ रही थी और दिल जोरो से घबरारहे थे ।

Write a comment ...
Write a comment ...